ग्लोबल हैंडवाशिंग डे: साबुन-पानी से हाथ धोना, स्वस्थ परिवार और समाज का आधार

मुकेश शर्मा

लखनऊ। हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे (वैश्विक हाथ धुलाई दिवस) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को हाथों की स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और साबुन-पानी से सही तरीके से हाथ धोने की आदत को बढ़ावा देना है। इस वर्ष की थीम “हाथ धोने के हीरो बनें!” (Be a Handwashing Hero!) है, जो लोगों को अपने साथ परिवार और समुदाय में भी स्वच्छता की अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

दूषित हाथ डायरिया, हैजा, टाइफाइड, निमोनिया, फ्लू और कई अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रसार का कारण बन सकते हैं। हाथों के जरिए कीटाणु भोजन, त्वचा, आंखों, नाक और मुंह तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में साबुन-पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना संक्रमण से बचाव का आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका है।

सही तरीके से हाथ धोना जरूरी

हाथ धोते समय पहले उन्हें साफ पानी से गीला करें और साबुन लगाएं। इसके बाद हथेलियों, हाथों के पिछले हिस्से, उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और कलाइयों को अच्छी तरह रगड़ें। कम से कम 20 सेकंड तक हाथ साफ करने के बाद पानी से धो लें और साफ तौलिये या हवा की मदद से सुखाएं।

शौचालय के इस्तेमाल के बाद, खाना बनाने और खाने से पहले, खांसने-छींकने के बाद, बच्चों का मल साफ करने, जानवरों की देखभाल और मरीजों की सेवा से पहले तथा बाद में हाथ धोना जरूरी है।

बच्चों में बचपन से डालें आदत

स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर साबुन-पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। बच्चों को बचपन से हाथ धोने की आदत सिखाने से वे जीवनभर स्वच्छता के प्रति सजग रह सकते हैं।

विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों की सुरक्षा के लिए हाथों की स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत संक्रमण का प्रसार कम करने, जीवन बचाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं।)

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